श्राद्ध में क्या करना चाहिए

 हिंदू पंचांग के अनुसार पित्र पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है और अमावस्या पर समापन होता है .पितृपक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है .श्राद्ध कर के पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है पिंडदान किया जाता है और तर्पण किया जाता है.

 इस बार श्राद्ध 10 सितंबर से शुरू होकर 25  सितंबर रहेगे.

श्राद्ध में क्या करना चाहिए और क्या नहीं

पितरों को प्रसन्न करने के लिए उनके नाम से प्याऊ लगवाना चाहिए

 पितरों का ध्यान  करके पीपल के पेड़ को को जल चढ़ाएं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें.

  मांस मदिरा नहीं खाना चाहिए

  पितृ पक्ष के दिनों में भिखारी या किसी भी अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए क्योंकि पितृ किसी भी रूप में पधार सकते हैं .पशु पक्षी जैसी कुत्ते ,कोए ,गाय का अपमान नहीं करना चाहिए.

पितृ पक्ष में पूर्वज की मृत्यु की तिथि के दिन सात्विक भोजन ब्राह्मणों को करवाना चाहिए.अगर तिथि याद ना हो तो अमावस्या के दिन भी श्राद्ध किया जा सकता है.

श्राद्ध के भोजन में पितरों का मनपसंद खाना बनाना चाहिए.साथ में खीर ,काशीफल ,उड़द दाल से बनी चीजों का पितृ पक्ष में विशेष महत्व है.

भोजन में लहसुन प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि से तामसिक भोजन माना जाता है .कुछ लोगों का मानना होता है कि हमारे पितरों को तो मांसाहार पसंद है तो क्या हम वैसा भोजन दे सकते हैं .पितृ पक्ष में मांसाहार निषेध है इसलिए ऐसा भोजन नहीं देना चाहिए नहीं तो बहुत अशुभ होता है.

श्राद्ध कर्म के दौरान लोहे के बर्तनों का प्रयोग अशुभ माना गया है तांबे या फिर अन्य धातु के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए.

 जिस दिन पितरों का श्राद्ध करें उस दिन शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और इत्र नहीं लगाना चाहिए.

जिस दिन पितृ श्राद्ध करें उस दिन पुरुषों को दाढ़ी,बाल नहीं कटवाने चाहिए ऐसा करने से माना जाता है धन की हानि होती है.

श्रीमद्भागवत गीता के 7 वें अध्याय का पाठ करने से पित्र प्रसन्न होते हैं .


यह भी पढ़े: गया जी में श्राद्ध क्यों करते हैं

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