SAKAT CHAUTH VRAT KATHA
संकट चौथ व्रत कथा हिन्दी में
संकट चौथ व्रत का महत्व
संकट चौथ पर गणेश जी का व्रत रखने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं .यह व्रत मां अपने संतान की दीर्घायु और सुख की कामना के लिए रखती हैं .रात को चंद्रमा को गुड़, तिल और जल का अर्ध्य देने के बाद व्रत खोला जाता है और तिल, गुड़ ,शकरंद और फल का भोग लगाकर पारण करते हैं.
संकट चौथ व्रत कथा
यह कुम्हार था .उसका आवा नहीं पकता था .उसने अपनी समस्या राजा से बताई और राजा से समाधान करने के लिए कहा. राजा ने कई विद्वानों से इसका कारण पूछा. उन्होंने बताया कि अगर कोई ब्राह्मणी जिसका एक पुत्र हो अगर वह उसके बालक की बलि दी जाए तो आवा पक जाएगा.
उस नगर में एक ब्राह्मणी थी जिसका केवल एक ही पुत्र था. राजा का यह संदेशा लेकर मंत्री ब्राह्मणी के पास गया. ब्राह्मणी कहने लगी कि राजा की आज्ञा के आगे मेरा कोई वश नहीं है. मुझे अपना पुत्र भेजना ही पड़ेगा. उसने अपने पुत्र को ले जाने की अनुमति दे दी.
उसने अपने पुत्र को तिल दिए और कहा कि जहां तुझे बिठाए वहां आसपास सारे बिखेर देना और गणेश जी का ध्यान करते रहना. आवा लगाया गया. वहां सबसे नीचे पहले एक लड़के को बिठाया गया और उसके ऊपर फिर आवा लगा कर आग जला दी गई. कुम्हार का आवा पक गया लेकिन राजा के मन में गिलानी थी कि मेरे कारण ब्राह्मणी का पुत्र की बलि दी गई.
उस आवे में से बिल्ली के बच्चों की आवाज आ रही थी उस आवे को खाली किया गया तो उसमें से एक बिल्ली अपने बच्चों के साथ जिंदा निकली. ईश्वर का चमत्कार देखकर सब हैरान थे .सब सोचने लगे अगर बिल्ली अपने बच्चों के साथ जिंदा निकली है तो शायद ब्राह्मणी का बेटा भी जिंदा हो. जब और नीचे देखा गया तो वह ब्राह्मणी का बेटा जिंदा था .
उसकी मां ने जो तिल दिए थे वह काफी लंबे हो चुके थे. राजा उस लड़के ने पूछा " तुमने ऐसा क्या चमत्कार किया जो इतनी आग जल गई लेकिन तुम सही सलामत बच गए ". वह लड़का कहने लगा इसमें मेरा कोई चमत्कार नहीं है . मेरी माँ ने मुझे यह तिल दिए थे और बोला था कि अपने आसपास बिखेर लेना और गणेश जी का ध्यान करते रहना . मैंने वैसा ही किया.आग की तपिश मुझ तक पहुंच ही नहीं पाई.
फिर राजा ने उस ब्राह्मणी को बुलाया लेकिन उसे विश्वास नहीं हुआ कि मेरा बेटा जिंदा है. वह सोचने लगी कि इतना ईधन उस आवे में जल गया. मेरा बेटा कहां बचा होगा लेकिन जब मंत्रियों ने विश्वास दिलाया कि आप का बेटा सुरक्षित है.
राजा ने ब्राह्मणी से पूछा कि ऐसा क्या चमत्कार है कि तुम्हारे पुत्र dको आग छू भी नहीं पाई. फिर ब्राह्मणी ने कहा कि मैं गणेश जी का संकट चौथ का व्रत रखती हूँ. आज भी मैंने गणेश जी का व्रत रखा हुआ था. मैंने गणेश जी से अपने पुत्र की दीर्घायु की कामना की थी. इस में मेरा कोई चमत्कार नहीं है यह सब गणेश जी के व्रत का फल है. गणेश जी ने ही मेरे पुत्र की रक्षा की है
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